सरहद पे करते है रखवाली वो हमारी हमारा डर उनकी हिमत से छुप जाता है वो अपने दर्दो को नही देखते कभी वो अपने सपनो को नही सजाते कभी सब कुछ लुटा देते है वो हमारे लिए कुछ अपने लिए नही मांगते कभी
प्रsHant Nagia
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