Sunday, 11 September 2016

इबादत


इश्क ही इश्क की इबादत को समझ सकता हैI
बस तू नही समझी........
मे तो आसमान से तुम्हारे लिए चाँद तारे तोड़ लाया
बस तुम नही समझी.......
कम्भ्कक्त प्यार को इतना ना समझ , किस ने बना दिया मै समझ गया
बस तू नही समझी.......
 
प्रsHant Nagia

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