Sunday, 11 September 2016

बचपन की यादे

                         [ बचपन की यादे ]
तुझे मिल जाये वो मेरे खोए हुए खिलोने बचपन के तो लौटा देना
तुझे मिल जाये वो मेरे रूठे हुए दोस्त बचपन के तो उन्हें हंसा देना
घुमते थे जिन गलियों मे हम सब साथ मे
अब वही से गुज़र जाते है अकेले हिलाते हाथ
कभी लगते थे छोटे ये दिन बात करने को
अब ये वक़्त बोहत तेज़ी से गुज़र जाता है वक़्त के साथ

प्रsHant Nagia

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