Thursday, 22 September 2016

बेताबिया

बेताबिया बढ  रही है.........
नजदीकिया बढ रही है......
मेरी सांसो से तेरी सांसे जोड़ रही  है
तुम रूकती हो तो हम रुक जाते है
चलती हो तो गुम हुए रास्ते मिल जाते है
मंजिल लगती है अब और भी करीब
सांसो को चलने की वजह मिल जाती है

प्रsHant Nagia

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