यह केसी अजब सी उलझन थी मेरे साथ दर्द मै भी तुम थी और दर्दो की दवा भी प्रsHant Nagia
जबसे तुमको देखा मै खो गया हूँ तेरे सपनो की नींद लिये सो गया हूँ। सपनो की बाते पुरी हो रही है मुझसे मिलके तू मुझ मै ही खो रही है। दूरियों मे नजदीकिया सी हो रही है मीलने की बेकरारी भड रही है। प्रsHant Nagia