उसे कदर ही नही थी मेरी बातों की,
और मै जिंदगी साथ मे बिताने की सोच रहा था।
प्रsHant Nagia
Lafz
Friday, 20 December 2024
Saturday, 23 September 2017
Badalte Log
Badalte mausam ache lgte Hai
Badalte hue Log Nhi
Badlate manzar ache lgte Hai
Badalte hue kadam Nhi
Mai badlo ya tu badle Baat ek hi Hai
Bichdege dono hi Sath ek hi Hai
Thursday, 8 June 2017
Chehera tera
Woh chehara tera andaaj tera, baatein teri ehsaas tera
Jo tere saath mein bite the, kuchh lahme hansi kuchh shaam-o-subah
Unko tu abhi ae jaan meri kuchh der toh mera rehane de
Saturday, 25 February 2017
किताबो का बोझ
किताबो का बोझ
किताबे बोझ बनकर रह गई
पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक ,
नही हटती थी उन किताबो के नजरें
नही झपकती थी इन किताबो के सामने पलके ,
बना रहता था हर वक़्त परीक्षाओ का डर
अगर फ़ैल हो गए परीक्षा में तो बैठना पड़ेगा कक्षा में उसी कदर ,
अध्यापक द्वारा दिया गया ग्रहकार्ये ना करने पर
फिर खूब डांट लगता और उठक-बैठक करता,
ना हम घर के रह जाते,ना बाहर के रह जाते
हाथ हमेशा उन्ही किताबो पैर टिके रह जाते,
[नूपुर कुमार बड़ोलिया ]
Wednesday, 14 December 2016
खो रहा हूँ
जबसे तुमको देखा मै खो गया हूँ
तेरे सपनो की नींद लिये सो गया हूँ।
सपनो की बाते पुरी हो रही है
मुझसे मिलके तू मुझ मै ही खो रही है।
दूरियों मे नजदीकिया सी हो रही है
मीलने की बेकरारी भड रही है।
प्रsHant Nagia
Monday, 7 November 2016
माँ का इंतजार
अजीब ख्याल आते है जब लौटता नही वो घर
डर लगता है मुझे अकेले केसे चल रहा होगा
रात के अंधेरो मै उन सुनी सडको पर
आंखे दरवाजे पे रुकी थी मानो जेसे सांसे रुकी थी
नींद आती नही उसके ना आने तक मुझे घर
बेचानिया बढ रही थी मेरी तस्स्लियो की
वो मिल जाये तो सब्र खतम हो मेरे इंतजार का
प्रsHant Nagia