Monday, 7 November 2016

माँ का इंतजार

अजीब ख्याल आते है जब लौटता नही वो घर
डर लगता है मुझे अकेले केसे चल रहा होगा
रात के अंधेरो मै उन सुनी सडको पर
आंखे दरवाजे पे रुकी थी मानो जेसे सांसे रुकी थी
नींद आती नही उसके ना आने तक मुझे घर
बेचानिया बढ रही थी मेरी तस्स्लियो की
वो मिल जाये तो सब्र खतम हो मेरे इंतजार का
प्रsHant Nagia